दिनांक 23 सितंबर 2015
खाद्य व्यापारी तथा कारोबारी को लायसेंस
लेना तथा पंजीयन कराना आवश्यक
लोक सेवा गारंटी अधिनियम
2
करोड़ 95 लाख से अधिक आवेदक को मिला फायदा
जिला जनसंपर्क कार्यालय, देवास
॥ स मा चा र ॥
देवास उपनिर्वाचन को लेकर समीक्षा बैठक 28 को
देवास 23 सितंबर 2015/ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र-171
देवास के उप निर्वाचन के लिए 28 सितंबर सोमवार दोपहर 2 बजे (टीएल बैठक के बाद) कलेक्टर
कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित की जाएगी, जिसमें उप निर्वाचन 2015 के लिए आवश्यक बिंदुओं
पर सौंपे गए कार्यों पर समीक्षा की जाएगी। अपर कलेक्टर एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी
डॉ. कैलाश बुंदेला ने सभी संबंधितों से बैठक में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
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अतिरिक्त कक्ष निर्माण की अंतिम किश्त जारी
देवास 23 सितंबर 2015/ जिला शिक्षा केंद्र देवास द्वारा
11 ग्रामों में विद्यालय भवन के अतिरिक्त कक्ष के निर्माण की अंतिम किश्त जारी कर दी
गई है। निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायतों के बैंक खातों में 15 लाख छियानवे हजार आठ सौ
सोलह रूपए जमा कराए जा रहे हैं। इनमें कांजीपुरा, खेरकोठड़ा, ओंकारा, बरखेड़ी, बड़कन,
कालोनी आदि, बस्ती बोरखेड़ा, मानकुंड, दखनाखेड़ी, आवंल्या पीपल्या, नगोरा तथा करनाखेड़ी
शामिल है।
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जिले में बनाए गए 2 लाख 44 हजार जाति प्रमाण पत्र
देवास 23 सितंबर 2015/ जिले में
विद्यार्थियों के लिए जाति प्रमाण पत्र बनाने में प्रशासन ने आगे रहकर काम किया है।
कलेक्टर आशुतोष अवस्थी द्वारा प्रति सप्ताह समीक्षा करने से राजस्व अधिकारियों ने तत्परता से जाति प्रमाण पत्र
बनाए। जिले में कुल 2 लाख 44 हजार 607 जाति प्रमाण पत्र बनाकर विद्यार्थियों को दिए
गए हैं। प्रमाण पत्र बनाने के लिए विद्यार्थियों अथवा उनके माता-पिता को तहसीलों के
चक्कर भी नहीं लगाने पड़े। सभी में उनके स्कूल के माध्यम से ही आवेदन लिए गए।
अपर
कलेक्टर डॉ. कैलाश बुंदेला ने बताया है कि एसडीएम देवास ने 44 हजार 47, एसडीएम कन्नौद
ने 22 हजार 955, एसडीएम खातेगावं ने 66 हजार 40, एसडीएम सोनकच्छ ने 34 हजार 824, एसडीएम
टोंकखुर्द 50 हजार 163 तथा एसडीएम बागली 26 हजार 578 जाति प्रमाण पत्रों को निराकृत
किया है।
क्रमांक 149/1121/23-09-2015
जिला जनसंपर्क कार्यालय, देवास
॥ स मा चा र ॥
कृषि विभाग ने किसानों को दी सामयिक सलाह
देवास 23 सितंबर 2015/ अतिशीघ्र
एवं मध्यम समय में पकने वाली अरहर में इस वर्ष मरू का विट्राटा (धब्बेदार फली भेदक)
का प्रकोप फिलहाल अभी दृष्टिगोचर नहीं हुआ है। कृषि विभाग द्वारा जिले के किसानों को
सलाह दी गई है कि इस पीडक कीट का प्रयोग होने की स्थिति में इंडाक्साकार्ब 5 मिली/
10 लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।
उप
संचालक कृषि ने बताया कि उकठा से प्रभावित पौधों को उखाड़ कर खेत से बाहर फेंक देना
चाहिए। बीमारी के अत्याधिक प्रकोप की दशा में कार्बेन्डाजिम 1 मिली/ लीटर पानी में
घोलकर खेत में प्रभावित स्थानों को सराबोर करें। उन्होंने बताया कि मुंग एवं उर्द की
वर्तमान स्थिति में खड़ी फसल में जहां सफेद मक्खी का भंयकर प्रकोप हो वहां किसानों को
पायरेथ्राएड का प्रयोग न करें। कीट पतंगों को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने वाले
मित्र कीट का बचाव करें। पीला लसलसा प्रपंच (ट्रेप) को एक ट्रेप/ 100 मीटर की दर से खेत में लगाएं। नीम
तेल 2.5 लीटर/ हैक्टेयर डिटरजेंट 0.05 प्रतिशत के साथ मिलाकर छिड़काव करें।
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खाद्य व्यापारी तथा कारोबारी को लायसेंस
लेना तथा पंजीयन कराना आवश्यक
देवास 23
सितंबर 2015/ खाद्य सुरक्षा
एवं मानक अधिनियम 2006, सम्पूर्ण भारत देश में 5 अगस्त 2011 से लागू है। भारत सरकार
द्वारा अंतिम तिथि 4 फरवरी 2016 निर्धारित की गई है। लोक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते
हुए सभी खाद्य कारोबार कर्ताओं के लिये खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा
31 के अनुसार खाद्य कारोबार चाहे शासकीय हो या अशासकीय खाद्य लायसेन्स/पंजीयन सभी को
लेना अनिवार्य किया है।
खाद्य लायसेन्स/पंजीयन की प्रक्रिया पूर्णतः
ऑनलाईन है। खाद्य व्यवसाय के पिछले वार्षिक टर्न ओवर/ कारोबार अनुसार खाद्य लायसेंस/
पंजीयन के लिये आवेदन विभाग की बेवसाईट www.foodlicensing.fssai.gov.in या mponline kiosk के द्वारा
किया जा सकता है। खाद्य कारोबार चाहे शासकीय हो या अशासकीय, अपना खाद्य व्यवसाय शुरू
करने के कम से कम 15 दिन पूर्व अनिवार्य रूप से खाद्य लायसेन्स/रजिस्ट्रेशन के लिये
ऑनलाईन आवेदन करें।
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जिले में 1126.61 मिलीमीटर
औसत वर्षा दर्ज
देवास 23 सितंबर 2015/
जारी मानसून सत्र में जिले के वर्षामापी केन्द्रों पर अभी तक औसत रूप से 1126.61 मिलीमीटर
वर्षा दर्ज की गई है। अधीक्षक भू-अभिलेख से प्राप्त जानकारी के अनुसार जारी मानसून
सत्र में अभी तक सर्वाधिक सोनकच्छ में 1379, खातेगांव में 1345, कन्नौद में 1238, उदयनगर
में 1227.90, देवास में 1064, टोंकखुर्द में 945, सतवास में 930 तथा बागली में 884
मिमी औसत वर्षा रिकॉर्ड की गई।
24 घंटे में शून्य मिमी
वर्षा दर्ज की गई
पिछले 24 घंटों में शून्य मिमी वर्षा दर्ज की गई,
जिसमें देवास में, सतवास में, कन्नौद में, उदयनगर में, खातेगांव में, सोनकच्छ में,
टोंकखुर्द में तथा बागली में शून्य मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है।
गत वर्ष इस दिनांक को शून्य
मिमी वर्षा दर्ज हुई थी
गत वर्ष 22 सितंबर को जिले में शून्य मिमी औसत
वर्षा दर्ज की गई, जिसमें सोनकच्छ में, सतवास में, टोंकखुर्द में, देवास में, खातेगांव
में, बागली में, उदयनगर में तथा कन्नौद में शून्य मिमी वर्षा दर्ज की गई।
पिछले साल 563.00 मिमी औसत
वर्षा
अधीक्षक भू-अभिलेख से प्राप्त जानकारी के अनुसार
गत मानसून सत्र में अभी तक 563.00 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी, जिसमें सोनकच्छ में 702,
उदयनगर में 630, देवास में 626, टोंकखुर्द में 596, कन्नौद में 541, बागली में
528, खातेगांव में 487, सतवास में 394 मिमी वर्षा दर्ज की गई।
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लोक सेवा गारंटी अधिनियम
2
करोड़ 95 लाख से अधिक आवेदक को मिला फायदा
लगभग 72 सेवाएँ ऑनलाइन उपलब्ध
देवास
23 सितंबर 2015/ मध्यप्रदेश में आम नागरिकों को समय-सीमा में लोक सेवाएँ देने के
लिए लागू अधिनियम में अब तक 2 करोड़ 95 लाख 34 हजार से अधिक आवेदक को इसका फायदा पहुँचाया
गया है। समय-सीमा में सेवाएँ न देने वाले 253 अधिकारी-कर्मचारियों पर 13 लाख से ज्यादा
का जुर्माना किया गया है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2010 में शुरू की गयी इस अभिनव जन-हितकारी
पहल को देश के तकरीबन 20 राज्य ने अपनाया है।
लोक सेवाओं की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने
के लिये लागू लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम में अभी तक 23 विभाग की लगभग
155 सेवा को दायरे में लाया जा चुका है। इनमें से लगभग 72 सेवा के ऑनलाइन आवेदन प्रदेश
में संचालित 336 लोक सेवा केन्द्र के जरिये प्राप्त किये जा रहे हैं।
अपनी तरह के इस अनूठे कानून के जरिये प्रदेश में
लगभग 486 आवेदक को प्रतिकर के रूप में 4.50 लाख रुपये से अधिक की राशि का भुगतान किया
जा चुका है। इस व्यवस्था की नियमित मॉनीटरिंग भी की जा रही है।
नई कार्य-संस्कृति
उल्लेखनीय है कि आम-जनता के दैनंदिन के कार्यों
को समय पर करने के प्रति लोक सेवक सतर्क रहें और सेवा प्रदान करने के लिये अपने दायित्व
का प्रभावी निर्वहन कर सकें इसके लिये हरेक चिन्हित सेवा को प्रदान करने की समय-सीमा
निर्धारित की गई है। मध्यप्रदेश संभवत: देश का ऐसा पहला राज्य है जिसने अधिसूचित
सेवाओं को समय-सीमा में नागरिकों को मुहैया करवाने के लिये कानूनी गारंटी दी है। इस
प्रकार इस कानून के जरिये मध्यप्रदेश में एक नई कार्य-संस्कृति विकसित हुई है। मध्यप्रदेश
के बाद इस कानून को 20 अन्य राज्य यथा बिहार, पंजाब, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, उत्तराखण्ड,
दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, झारखण्ड आदि ने भी अपनाया है।
लोक सेवा गारंटी अधिनियम में सेवाओं को प्रदान
करने की निश्चित समय-सीमा तय की गई है। समय-सीमा में पदाभिहित अधिकारी को यह सेवा प्रदान
करनी होती है। समय-सीमा में काम न करने या अनावश्यक विलंब करने वाले अधिकारी एवं कर्मचारी
पर दण्ड का प्रावधान है। यह दण्ड 250 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक का है। दण्ड के
रूप में मिलने वाली राशि आवेदक को क्षति-पूर्ति के रूप में दी जाती है। इस कानून को
प्रभावी ढंग से लागू करने के लिये राज्य शासन ने लोक सेवा प्रबंधन विभाग के अंतर्गत
‘राज्य लोक सेवा अभिकरण’ का गठन किया है। प्रदेश में 336 में से 120 लोक सेवा केन्द्र
के भवन बनकर तैयार हो चुके हैं। सभी लोक सेवा केन्द्रों को स्वॉन (स्टेट वाइड एरिया
नेटवर्क) कनेक्टिविटी उपलब्ध करवाई जा रही है।
संयुक्त राष्ट्र संघ का अवार्ड
उल्लेखनीय है कि लोक सेवा गारंटी अधिनियम के सफल
क्रियान्वयन के लिये लोक सेवा प्रबंधन विभाग को जून, 2012 में बेहतर प्रबंधन एवं बेहतर
लोक सेवा के लिये संयुक्त
राष्ट्र संघ का पब्लिक सर्विस अवार्ड प्राप्त हो चुका है। लोक सेवा गारंटी अधिनियम को लागू करने के
लिये प्रदेश को स्कॉच अवार्ड
एवं स्टेट आई.टी. ई-गवर्नेंस अवार्ड भी मिल चुका है। अधिनियम में अधिसूचित सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध
करवाने के लिये प्रदेश में 12 हजार से अधिक अधिकारियों के डिजिटल सिग्नेचर बनवाए गए
हैं। कई सेवाओं के ऑनलाइन डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। डिजिटल
हस्ताक्षरित सर्टिफिकेट एक कॉमन रिपॉजिटरी वेबसाइट www.mpedistrict.mp.gov.in
पर उपलब्ध हैं।
प्रदेश में गव्हर्नमेंट प्रोसेस री-इंजीनियरिंग
के अंतर्गत शासकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने एवं पुनर्निर्धारण के लिये मुख्य सचिव
की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय साधिकार समिति द्वारा सेवा प्रदाय की प्रक्रिया
को सरल बनाने के प्रस्ताव रखे गये थे। इसके अनुसार स्व-घोषणा-पत्र के आधार पर स्थानीय
निवासी प्रमाण-पत्र एवं आय प्रमाण-पत्र जारी करने की व्यवस्था शुरू की गई है। इसी
प्रकार शपथ-पत्र के स्थान पर स्व-प्रमाणित घोषण-पत्र के आधार पर सेवाओं के प्रदाय
की शुरुआत की गई है। इसके अच्छे नतीजे सामने आ रहे हैं।
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