Tuesday, 6 October 2015

 दिनांक 06 अक्टूबर 2015/ 
जिला जनसंपर्क कार्यालय, देवास

॥ स मा चा र॥

जनसुनवाई में आवेदकों ने दिए आवेदन

    देवास 06 अक्टूबर 2015/ कलेक्टर स्तर पर जनसुनवाई में आज मंगलवार को मल्हार स्मृति मंदिर में आवेदकों ने सीईओ जिला पंचायत प्रबल सिपाहा के  समक्ष अपने आवेदन पत्र प्रस्तुत किए। सीईओ ने सभी पर सुनवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवेदनों की जांच कर त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। जनसुनवाई में अपर कलेक्टर डॉ. कैलाश बुंदेला, संयुक्त कलेक्टर सारिका भूरिया तथा अन्य विभागों के जिला अधिकारी उपस्थित थे।
इंदिरा आवास की किश्त दिलाई जाए
       आवेदक देवेंद्र पिता भागीरथ निवासी ग्राम पोलाय जागीर तहसील सोनकच्छ ने आवेदन देते हुए बताया कि इंदिरा आवास के अंतर्गत उसे प्रथम किश्त प्राप्त हो चुकी है, जिससे उसने मकान की दीवार तैयार कर ली है। अब उसे योजना के अंतर्गत दूसरी किश्त दिलाई जाए। इस पर जिला पंचायत सीईओ ने संबंधित अधिकारी को निराकरण के निर्देश दिए।
कन्यादान की सामग्री दिलाई जाए
       आवेदक सुखराम पिता मांगीलाल निवासी बालौदा ने आवेदन देते हुए बताया कि उसकी पुत्री पूजा का विवाह रवि पिता काशीराम निवासी खेड़ा खजुरिया सोनकच्छ के साथ मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के अंतर्गत 29 अप्रैल 2015 को हुआ था, परंतु आज दिनांक तक उसे कन्यादान की सामग्री नहीं मिली। इस पर सीईओ जिला पंचायत ने एसडीएम सोनकच्छ को कार्यवाही कर निराकरण के निर्देश दिए।
       शासकीय रास्ते पर घुड़ा व गंदगी करते हैं
       जनसुनवाई में आवेदक मेणाबाई पति तेजकरण निवासी अचलुखेड़ी तहसील देवास ने आवेदन देते हुए बताया कि  उसके मकान के आने जाने वाले रास्ते पर अन्य व्यक्त्‍िा द्वारा कचरा डालकर घुड़ा बना लिया है तथा वहां पर प्रतिदिन गंदगी करता है जिससे उसे घर जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आवेदक के आवेदन पर सीईओ जिला पंचायत ने सीईओ जनपद पंचायत देवास को निराकरण के निर्देश दिए।
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प्राकृतिक सुंदरता से मन मोहता है खिवनी अभ्यारण्य

       देवास 06 अक्टूबर 2015/ सुरम्य ऊंची-नीची विध्यांचल पर्वत्‍ मालाओं की गोद में स्थित खिवनी अभ्यारण्य देवास जिले में पर्यटन का आकर्षण है। इसके उत्तर में अनेक पहाड़िया एवं घाटियां है। ऊंची-नीची पहाड़ियों एवं घाटियों युक्त भौगोलिक स्थिति के कारण इसकी प्राकृतिक छटा अनुपम है। जामनेद नदी एवं अनेक छोटे-बड़े नाले नर्मदा बेसिन का भाग बनाते है। मुख्य वन संरक्षक उज्जैन डॉ. पीसी दुबे का कहना है कि इस अभ्यारण्य को वन पर्यटन के राष्ट्रीय मानचित्र में स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास जारी हैं।
वन्य प्राणियों का प्राकृतिक आवास है खिवनी
       अभ्यारण्य में मुख्य रूप से तेंदुआ, लकड़बग्घा, भेड़िया, सियार, चिकारा, चीतल, सॉमर, भेड़की, नीलगाय, जंगली सुअर, लंगूर, लाल मुंह के बंदर, सेही खरगोश आदि वन्य प्राणी स्वच्छंद विचरण करते हुए समय-समय पर देखे जा सकते हैं। 
मप्र का राज्य पक्षी देख सकते हैं खिवनी में
       मप्र का राज्य पक्षी इंडियन पेराडाइस फ्लाईकेचर यहां प्राय: देखा जाता है। अन्य पक्षियों में मोर, पपीहा, उल्लू, बाज, रॉबिन, बगुला, सारस, चील, तीतर, नीलकंठ, फाक्ता, तोता, कोयल, कूका, कठफोड़ा, बिलबिला, ड्रंगो, कोआ, मैना, बुलबुल, बया, बवलर, दर्जिन, धोविन आदि मुख्य रूप से अभ्यारण्य के आकर्षण है। यहां के कुछ भागों में अच्छे चारागाह क्षेत्र है, जहां पर कई भू-सतह पर घोसला बनाने वाले पक्षी पाए जाते है। पक्षियों की लगभग 110 से अधिक प्रजातियां यहां पाई जाती है।
नाना प्रकार की वनस्पति है खिवनी में
       अभ्यारण्य के वन सदर्न ट्रॉपीलकल ड्राई डेसीड्यूअस वनों की श्रेणी में आते है। अभ्यारण्य का अधिकांश भाग सागौन के बहुमूल्य वनों का है। इसके अलावा साजा, धावड़ा, सलई, मोयन, आंवला, धामन, हल्दू, कलम, इमली, अर्जुन, महुआ, शीशम, बहेड़ा, खेर, कुल्लु, तिंसा, बीजा, पलाश तथा ढलानों पर बांस बहुतायत से पाया जाता है। सिराली, दुधी, लेंटाना, बैकल, घटबोर की झाड़ियों के अलावा सिरेटा, धनवेला काला बैला, कांच की कुटी आदि बैल प्रजातियां पाई जाती है। पोनिया, गोदराली, कुंदा, फुलेरा, सुकला एवं रोशा घांस मुख्य रूप से पाई जाती है।
मन मोहती हैं घाटियां
        अभ्यारण्य क्षेत्र में अनेक पहाड़ियां एवं घाटियां होने से यह क्षेत्र ट्रेकिंग के लिए उपयुक्त है। सियाघाट से दौलतपुर, दौलतपुर से रूपादा, दौलतपुर से खिवनी, मोहाई से खिवनी व रीछीगेट से पटरानी आदि वन मार्ग अभ्यारण में आने-जाने के मुख्य रास्ते है। रास्तों के दोनों ओर वनों की छटा निराली है। खिवनी दौलतपुर वन मार्ग स्थित व्यू पाइंट तथा कलम तलाई से अभ्यारण्य का अनुपम दृश्य दिखाई देता है। ढलानों पर वॉच टॉवर, गोलकोठी जैसी पुरानी संरचनाएं तथा कलम तलाई तालाब आकर्षण का केंद्र है। खिवनी वनग्राम स्थित वन विश्राम गृह के पास बालगंगा नामक प्राकृतिक छटा से भरपूर, सुरम्य स्थल पर दो प्राचीन मंदिर यहां की धार्मिक आस्था के केंद्र बिंदु हैं। बालगंगा में पूरे वर्ष अज्ञात स्थाने से स्वच्छ पेयजल का प्रवाह अपने आप में चमत्कार है। यहां हर पूर्णिमा, अमावस्या तथा शिवरात्रि आदि पर सैकड़ों श्रद्धालु स्नान करने आते हैं। इन अवसर पर यहां धार्मिक मेले का वातावरण निर्मित हो जाता है।
वनग्राम में हैं वन विश्राम गृह
      खिवनी वनग्राम में दो सूट का आवश्यक सुविधाओं युक्त एक वन विश्राम गृह विभाग के अधिकारियों के रूकने के लिए उपलब्ध है। यथा संभव पर्यटकों को यहां रूकने की सुविधा रिक्त एवं आवश्यक होने पर उपलब्ध कराई जाती है।
सुरक्षा व्यवस्था
        अभ्यारण्य की सुरक्षा 5 परिक्षेत्र सहायक व 13 परिसर प्रभारियों के अलावा चार चैकिंग नो पर स्थित वन स्टॉफ द्वारा सुनिश्चित की जाती है।
इस तरह पहुंच सकते हैं खिवनी
        खिवनी अभ्यारण्य में तीन विभिन्न दिशाओं से पहुंचा जा सकता है। इसके लिए उत्तर में सीहोर जिले के इच्छावर से, पश्चिम में आष्टा कन्नौद मार्ग के सियाघाट से, दक्षिण में आष्टा-कन्नौद मार्ग से कुसमानिया व बाद में भिलाई व औंकारा होकर पहुंचा जा सकता है। इसके साथ ही समीपस्थ बस स्टैंड देवास जिले के कन्नौद तथा सीहोर जिले में आष्टा है। कन्नौद एवं आष्टा से कुसमानिया होकर खिवनी अभ्यारण्य पहुंचा जा सकता है।
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अन्न क्षेत्र में लगातार मिल रहा दान
सोनकच्छ एसडीएम ने दिए 10 हजार रूपए
  देवास 06 अक्टूबर 2015/ मां चामुंडा टेकरी के शंखद्वार ‍स्थित अन्न क्षेत्र के लिए सोनकच्छ एसडीएम अंजली जोसफ ने 10 हजार रूपए का अंशदान दिया हैं।
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मिशन इंद्रधनुष के जरिये टीकाकरण सुरक्षा दर में वृद्धि की जाएगी 
       देवास 06 अक्टूबर 2015/ शासन के निर्देशानुसार मिशन इंद्रधनुष के अंर्तगत विशेष टीकाकरण सत्रों का आयोजन कर संपूर्ण टीकाकरण सुरक्षा दर में वृद्धि की जाएगी।
देवास जिला भी है शामिल
       मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ए.के. दीक्षित ने बताया कि मिशन इंद्रधनुष के अंर्तगत पूर्व में पंद्रह हाई रिस्क जिलों का चिन्हाकन किया गया था। दूसरे चरण में 25 जिलों को हाई रिस्क में शामिल किया गया है। अब शेष जिलों में भी मिशन इंद्रधनुष संचालित करने का निर्देश दिए गए है। उक्त 26 जिलों में देवास जिला भी सम्मिलित है ।
सभी का होगा टीकाकरण
       भारत शासन की महात्वाकांक्षी योजना मिशन इंद्रधनुष के माध्यम से उन हितग्राहियों जिसमें जन्म से 02 वर्ष तक के बच्चे तथा गर्भवती महिलाएं तक पहुंचना है, जो किन्हीं कारणों से टीकाकरण की सेवाओं से वंचित रह गए है। इसके लिए देवास जिले में मिशन की सफलता हेतु सूक्ष्म कार्य योजना तैयार कर नियमित टीकाकरण दिवस (मंगलवार एवं शुक्रवार के अतिरिक्त अन्य कार्य दिवसों में) चिन्हित क्षेत्रों में विशेष टीकाकरण सत्र का आयोजन कर टीकाकरण से वंचित एवं अपूर्ण टीकाकरण हुए गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों का संपूर्ण टीकाकरण किया जाएगा।

विशेष अभियान से होगा टीकाकरण
       देवास जिले में कुल 524 स्थानों/ क्षेत्र में निरंतर टीकाकरण सत्रों के माध्यम से संपूर्ण टीकाकरण सुरक्षा दर में वृद्धि करते हुए पूर्ण टीकाकरण का लक्ष्य प्राप्त किया जाएगा। इस के लिए देवास शहरी क्षेत्र में 172 सत्रों के माध्यम से 1582 बच्चे एवं 301 गर्भवती महिलाऐं, सोनकच्छ विकासखण्ड में 43 सत्रों के माध्यम से 237 बच्चे एवं 57 गर्भवती महिलाऐं, बागली विकासखण्ड 52 सत्रों के माध्यम से 247 बच्चे तथा 74 गर्भवती महिलाऐं, बरोठा विकासखण्ड में 147 सत्रों के माध्यम से 367 बच्चे एवं 107 गर्भवती महिलाएं, टोंकखुर्द विकासखण्ड में 41 सत्रों के माध्यम से 307 बच्चे तथा 131 गर्भवती महिलाऐं,खातेगांव विकासखण्ड में 9 सत्रों के माध्यम से 38 बच्चे एवं 23 गर्भवती महिलाएं तथा कन्नौद विकासखण्ड में 60 सत्रों के माध्यम से 296 बच्चे तथा 118 गर्भवती महिलाएं इस प्रकार कुल चिन्हित 524 सत्रों के माध्यम से 3074 बच्चों तथा 811 गर्भवती महिलाओं जो टीकाकरण से वंचित या अपूर्ण टीकाकरण हुआ है तो 17 अक्टूबर 2015 तक विशेष अभियान के माध्यम से पूर्ण टीकाकरण किया जाएगा ।
       मिशन इंद्रधनुष के माध्यम से निरंतर माह जनवरी 2016 तक विशेष अभियान के तहत नियमित टीकाकरण दिवस  मंगलवार एवं शुक्रवार के अतिरिक्त अन्य कार्य दिवसों में भी विशेष सत्रों के माध्यम से जन्म से 02 वर्ष तक समस्त बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण पूर्ण किया जाएगा। इस के लिए टीकाकरण की गुणवत्ता, टीकाकरण सत्रों का कार्य योजनानुसार आयोजन तथा चिन्हित बच्चे एवं गर्भवती महिलाओं को सुनिश्चित लाभ मिल सके इस के लिए विकासखण्ड, जिला स्तर एवं राज्य स्तर के दल द्वारा निरंतर मॉनिटरिंग एवं सुपरविजन किया जा रहा है। 
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गोपाल पुरस्कार वर्ष 2015-16
गोपाल पुरस्कार के अंतर्गत होंगी प्रतियोगिताएं
         देवास 06 अक्टूबर 2015/ भारतीय उन्नत नस्ल के गौवंशीय पशुओं के पालन को बढ़ावा देने एवं अधिक दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए पशु पालन विभाग द्वारा गोपाल पुरस्कार योजना संचालित की जा रही है। योजना भारतीय उन्नत नस्ल की गायों के दुग्ध उत्पादन में एवं भारतीय उन्नत नस्ल के गौवंशीय पशुओं की संख्या में वृद्धि होगी।  
        डॉ. जी.डी.वर्मा, उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं जिला देवास ने बताया कि योजना सभी वर्ग के पशु पालकों के लिए है, जिनके पास भारतीय नस्ल की गाय उपलब्ध हो तथा गाय का दुग्ध उत्पादन प्रतिदिन 4 लीटर या उससे अधिक हो। योजना विकासखण्ड स्तर, जिला स्तर एवं राज्य पर संचालित की जावेगी एवं विकासखण्ड स्तर पर प्रथम द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार तथा जिला एवं राज्य स्तर पर प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार एवं सांत्वना पुरस्कार दिए जाएंगे।
         विकासखण्ड स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन जिले के उपसंचालक पशु पालन विभाग देवास द्वारा नामांकित विकासखण्ड के पशु चिकित्सा सहायक शल्य चिकित्सक/ पशु चिकित्सा विस्तार अधिकारी सी.ई.ओ. जनपद की अध्यक्षता में समिति गठित कर सम्पन्न करेंगे।
       जिला स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन उपसंचालक पशु पालन विभाग सी.ई.ओ. जिला पंचायत की अध्यक्षता में समिति गठित कर सम्पन्न कराएंगे। अंर्तविभागीय स्वरुप देने के लिए जिला स्तरीय समिति में जिले के उपसंचालक, कृषि पदेन सदस्य के रुप में नामांकित रहेंगे। विकासखण्ड स्तर पर सर्वाधिक दुग्ध  देने वाली गाय को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार क्रमश: 10,000/-, 7500/- एवं 5000/- रूपए और जिले स्तर पर सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन देने वाली गाय को पुरस्कार प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार क्रमश: 50,000/-, 25000/- एवं 15000/- रूपए रहेंगे और जिला स्तर पर 7 गायों को 5000/- रूपए के मान से सांत्वना पुरस्कार दिया जाएगा।

प्रतियोगिताए होंगे आयोजित
       डॉ. जी.डी.वर्मा, उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं जिला देवास ने बताया कि प्रतियोगिता का आयोजन विकासखण्ड स्तर पर 28 अक्टूबर 2015 से 07 नवंबर 2015 के मध्य तथा जिला स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन 16 नवंबर 2015 से 25 नवंबर 2015 के मध्य किया जाएगा।
राज्य स्तर पर होगी प्रतियोगिताएं
       राज्य स्तर पर सर्वाधिक दुग्ध देने वाली गाय को पुरस्कार प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय 2.00 लाख रूपए, 1.00 लाख रूपए एवं 50000/- रूपए और 7 गायों को 10,000/- रूपए के मान से सांत्वना पुरस्कार दिये जाएंगे।
       पशु पालकों को जिनकी गाय की उत्पादकता कम से कम 4 लीटर प्रतिदिन या उससे अधिक है पशु पालन विभाग की संस्था पर उपलब्ध निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन कर वे इस योजना में भाग ले सकते है।
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