दिनांक- 23 फरवरी 2015
जिला जनसम्पर्क कार्यालय, देवास
फोटो और समाचार
जिला जनसंपर्क कार्यालय, देवास
॥ स मा चा र ॥
शंकरगढ़
पहाड़ी सहित अन्य पहाड़ियों पर दिये गये 33 खनिज पट्टे निरस्त
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खनिज
शर्तों के उल्लंघन एवं पर्यावरण प्रदूषण के चलते कलेक्टर ने की बड़ी कार्यवाही
देवास
23 फरवरी 2015/ देवास नगर के समीप
शंकरगढ़ पहाडी, पालनगर, राजोदा एवं देवास जूनियर में खनन कार्य के लिए 33
पट्टाधारियों के खनिज पट्टे, मध्यप्रदेश गौण खनिज नियम 1996 के उल्लंघन तथा
पर्यावरण प्रदूषण के चलते कलेक्टर श्री आशुतोष अवस्थी द्वारा निरस्त कर दिये गये
हैं। पट्टेधारियों को आदेश दिया गया है कि खदान क्षेत्र पर खनिज खनन व गिट्टी
निर्माण कार्य तत्काल बंद कर दिया जाये। खदान क्षेत्र पर स्थापित क्रेशर मशीन हटाई
जाये तथा खदान क्षेत्र का कब्जा 15 दिन के अंदर संबंधित क्षेत्र के खनिज निरीक्षक
को वापस सौंपा जाये।
कलेक्टर ने संबंधित अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, खनिज अधिकारी,
तहसीलदार, थाना प्रभारी, खनिज निरीक्षक, राजस्व निरीक्षक, हल्का पटवारी को आदेश
दिये हैं कि खदान क्षेत्र पर खनिज खनन व गिट्टी निर्माण कार्य तत्काल बंद करवाकर
क्रेशर मशीन आदि सील की जायें। अधीक्षण यंत्री विद्युत विभाग को खदान संचालन के
लिए दिया गया बिजली कनेक्शन बंद किये जाने के निर्देश दिये गये हैं। कार्रवाई
उपरांत पालन प्रतिवेदन 27 फरवरी तक कलेक्टर को प्रस्तुत किये जाने के निर्देश दिये
गये हैं।
इन खननकर्ताओं के किये पट्टे निरस्त
कलेक्टर द्वारा शंकरगढ पहाडी पर खननकर्ता बाबूलाल मालवीय, विजयलक्ष्मी
शर्मा, कविता चौहान, रविपालसिंह बैस, शरद त्रेहन, वंदना जोशी, जयराज पाटीदार,
स्वहेला खान, आरआर स्टोन, सलाउद्दीन, अमित सलोत्रा, मनोज जोशी, राजेश सिंह
बलोदिया, सुमेरसिंह, पृथवी कंस्ट्रक्शन कैलाश दायमा, संजय मालवीय, पालनगर से
मोहम्मद तनवीर, मोहम्मद फारूख, प्रवीण श्रीवास्तव, देवास जूनियर से ममता गोस्वामी,
नईमुद्दीन, जितेन्द्रसिंह, उस्मान शेख, इब्राहिम शेख, विपिन दुबे, राजोदा से
हेमलता गौड, दिनेश कुमावत, तंवरसिंह, अशोक सिंह गौड़, सुरेन्द्रसिंह गौड, सीमा
चौहान निलेश यादव के खनिज पट्टे निरस्त किये गये हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट विरोधाभाषी एवं
गलत
कलेक्टर द्वारा आदेश में उल्लेख किया गया है कि प्रकरणों में मध्यप्रदेश
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट विरोधाभाषी है। कलेक्टर ने पाया है कि
मध्यप्रदेश शासन की ओर से लोकहित में जिस संस्था मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण
बोर्ड की स्थापना की गई है, वह सार्वजनिक रूप से दिन दहाड़े खदानों पर खनन कार्यों
द्वारा गड्डे होल कर बलास्टिंग किये जाने तथा आसपास की आबादी को खतरा होने तथा
प्रदूषण से न केवलन अनभिज्ञ है, अपितु गलत रिपोर्ट दे रही है। बोर्ड ने गलत
सार्वजनिक रिपोर्ट प्रस्तुत कर विरोधाभाषी स्थिति निर्मित की है। बोर्ड की रिपोर्ट
में बताया गया है कि खननकर्ताओं द्वारा पहाड़ियों पर जल छिड़काव एवं वृक्षारोपण,
प्रदूषण रोकने के लिए, किये गये हैं, जो कि विरोधाभाषी है। कलेक्टर ने कहा है कि
जिस स्थल पर 51 फीट से 100 फीट तक होल कर उत्खनन किया जा रहा है, वहां पर
वृक्षारोपण एवं हॉपर जल छिड़काव के लिए स्प्रिंकलर लगाये जाना किसी भी प्रकार से
संभव नहीं है, जैसा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उज्जैन की रिपोर्ट में बताया गया
है। बड़े बड़े पत्थरों के उछलने के बीच पेड़ एवं स्प्रिंकलर अपना आस्तित्व नहीं बचा
सकते हैं। जांच में कहीं भी स्प्रिंकलर अथवा वृक्षारोपण नहीं पाया गया।
भौमिकी
तथा खनिकर्म विभाग की रिपोर्ट ने स्पष्ट की स्थिति
शंकरगढ पहाडी क्षेत्र देवास शहर से लगभग 3 किलोमीटर दक्षिण में
बायपास रोड के पास स्थित है तथा इस पहाड़ी की तलहटी में शंकरगढ़ गांव स्थित है।
पहाड़ी की उंचाई सतह से 120 मीटर है, जिसमें पहाड़ी की उपरी सतह से लगभग 1 से 10
मीटर तक कच्चा पत्थर/मुरम एवं 10 से 25 मीटर तक कड़ा पत्थर है, जिसमें बडे बडे गोल
बोल्डर भी मौजूद हैं तथा उसके पश्चात नीचे वेदर्ड बेसाल्ट पाया जाता है, जो कि
भुरभुरा प्रकृति का है। शंकरगढ क्षेत्र में 17 गिट्टी पत्थर के उल्खनिपट्टे
स्वीकृत हैं जो सभी कार्यशील हैं। खदान क्षेत्रों का भ्रमण करने पर पाया गया कि
पट्टाधारियों द्वारा माइनिंग प्लान के अनुरूप बेंच विकसित कर कार्य नहीं किया जा
रहा है तथा खदानों के स्पष्ट स्थायी सीमा चिन्ह स्थल पर मौजूद नहीं हैं तथा खदानों
के मध्य कोई सीमा नहीं रखी गई है। क्रेशर मशीनों पर वायु प्रदूषण को रोकने के लिए
पानी का छिडकाव व अन्य कोई व्यवस्था नहीं पाई गई। पट्टाधारियों द्वारा पहाडी से
पत्थर, ब्लास्टिंग कर निकाला जाता है एवं पहाडी को वर्टीकली सतह तक काटा गया है।
बेंच विकसित नहीं किये जाने से पहाडी के ऊपरी भाग को कोई आधार नहीं है, जिससे
पहाड़ी के स्खलित होने का खतरा है। नीचे तलहटी में शंकरगढ गांव स्थित है तथा गांव
में हनुमानजी की एक बडी प्रतिमा स्थापित है, जिसे ब्लास्टिंग होने से भविष्य में क्षति
होना संभावित है।
नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल के निर्देश पर की कलेक्टर
ने कार्यवाही
कलेक्टर द्वारा नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल में याचिका के विचारण के
दौरान तथा याचिका में पारित आदेश में दिए गए निर्देशों के परिपालन में ग्राम
शंकरगढ़ तहसील देवास स्थित सर्वे क्रमांक 404 रकबा एव अन्य पहाड़ियों के
पट्टेधारियों द्वारा पट्टे की अनुबंध की शर्तों के उल्लघंन के संबंध में पाया गया
कि उत्खनन पट्टा विलेख अनुसार स्वीकृत खदान क्षेत्र पर नियम अंतर्गत संधारित जाने
वाले वाले अभिलेख नहीं पाए गए हैं, जो मप्र गौण खनिज नियमावली 1996 के नियम 30(13)
का उल्लघंन है। स्वीकृत उत्खनिपट्टा खदान क्षेत्रों के प्रत्येक कोण पर नियमानुसार
पक्के सीमाचिन्ह कायम होना नहीं पाया गया, जो मप्र गौण खनिज नियमावली 1996 के नियम
30(11) का उल्लघंन है। मौका निरीक्षण के दौरान खदान की स्थिति प्रदर्शन करने वाला
पूर्ण विवरण बोर्ड नहीं पाया गया, जो मप्र गौण खनिज नियमावली 1996 के नियम 30(13)
का उल्लघंन है। खदान क्षेत्र में पर्यावरण सुरक्षा उपाय नहीं किए गए है, जो मप्र
गौण खनिज नियमावली 1996 के नियम 50 का उल्लघंन है। अग्रिम अनिवार्य भाटक की राशि
सूचना उपरांत भी जमा नहीं की गई है, जो मप्र गौण खनिज नियमावली 1996 के नियम 30(1)
का उल्लघंन है। साथ ही बकाया अतिरिक्त रायल्टी भी जमा नहीं किया।
जांच दल गठित कर कराई जांचे
कलेक्टर द्वारा अनियमितताओं की वास्वविकता की जांच के लिए जांच दल
गठित किया गया। जांच दल में राजस्व, वन, प्रदूषण व खनिज विभाग को शामिल किया गया।
जांच दल को नियमावली के बिंदुओं के आधार पर जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के
लिए निर्देशित किया गया। कलेक्टर द्वारा जांच दल में शामिल विभागों को जांच के
बिंदु दिए गए जिनके आधार पर जांच की गई। राजस्व विभाग को दिए गए निर्देश में कहा
गया कि प्रत्येक खदान को सीमांकित करने वाले पक्के, मुनारे स्थापित हैं या नहीं?
मौका स्थल स्वीकृत क्षेत्र का नक्क्षा से मिलानकर्ता है या नहीं यदि नहीं तो
पंचनामा में लिखा जाए और उस खदान का फिर से सीमाकंन कराया जाए। खनिज विभाग से कहा
गया कि क्या समस्त क्रेशर लीज एरिया में स्थापित है यदि नहीं तो क्यों नहीं?
क्रेशर मशीन यदि स्वीकृत क्षेत्र के बाहर स्थापित की गईग है तो खनिज व्यापारिक
अनुज्ञप्ति ली गई है या नहीं ? मप्र गौण खनिज नियमावली 1996 के नियम 5(2)- ग का
पालन किया जा रहा है या नहीं? स्वीकृति खदानों की गहराई भू सतह से 6 मीटर से अधिक
है या नहीं? खुदाई में बारूद उपयोग किया जाता है ? मजदूर 50 से अधिक हो जाते हैं
या नहीं? प्रदूषण विभाग के तहत जारी की गई सम्मति अनुसार पट्टाधारी द्वारा शर्तों
का पालन किया जा रहा है या नहीं?
जांच दल द्वारा दी गई रिपोर्ट
जांच के पश्चात राजस्व विभाग के तहसीलदार देवास के अनुसार ग्राम
शंकरगढ़ पटवारी हल्का नंबर 57 तहसील देवास में स्थित भूमि का खनिज विभाग द्वारा दिए
गए पट्टे भी भूमि पर मुनारे स्वीकृत क्षेत्र पर न लगाकर अन्य क्षेत्र पर लगाए गए
है। मौका स्थल स्वीकृत क्षेत्र का नक्शा मिलान नहीं होता है। वन विभाग द्वारा
जांच में पाया गया कि स्वीकृत क्षेत्र से वन क्षेत्र की दूरी 800 मीटर है। खनिज
विभाग द्वारा जांच में पाया गया कि 100 मीटर की परिधि के समीप ही धार्मिक स्थल,
मंदिर व स्कूल तथा बसावट है। मौके पर खदान क्षेत्र के अंदर उत्खनन किए गए क्षेत्र
में उच्चतम बिंदु से निम्नतम बिंदु के बीच की दूरी 6 मीटर से अधिक है, साथ ही
ब्लास्टिंग भी किया जाता है, वृक्षारोपण नहीं है। वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए
पानी छिड़काव की व्यवस्था नहीं है, ब्लास्टिंग से आसपास भारी कम्पन्न् होता है।
पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट
पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट अनुसार जिला मुख्यालय से 5 किमी दूर पर
शंकरगढ़ पहाड़ी पर प्राचीन भोलेनाथ जी का मंदिर और 51 फीट हनुमानजी की मूर्ति
स्थापित है, जिसके कारण आसपास कई गिट्टी खदानें है जहां पर 50 से 100 फीट गहरे होल
कर पत्थर फोड़ते है। इस कारण जमीन में कम्पन्न होता है, जिससे मंदिर एवं मूर्तियां
क्षतिग्रस्त होने की आशंका है। खदान माफियों का यह गोरखधंधा कई दिनों से पनप रहा
है। यहां मुस्लिम वर्ग की भी खदानें है। किसी भी दिन मूर्ति व मंदिर क्षतिग्रस्त
हो गया तो साम्प्रदायिक दंगा भड़कने की संभावना है।
जांच उपरांत कलेक्टर ने पाया
जांच के उपरांत कलेक्टर ने पाया कि खदान में नियमानुसार स्थाई सीमा
चिन्ह नहीं लगे है जो नियम 30 (11) ग का उल्लघंन है। पट्टेदार द्वारा मासिक पत्रक
नहीं दिया जा रहा है जो नियम 30 (20) ग का उल्लघंन है। पट्टेदार द्वारा खदान में
किया गया उत्खनन उच्चतम बिंदू से न्यूनतम बिंदु तक नापने पर 6 मीटर से अधिक तथा
खदान में ब्लास्टिंग किया जाता है, जिसकी सूचना निर्धारित प्रारूप में प्राधिकृत
अधिकारी को नहीं दी गई है जो नियम 30 (24) का उल्लघंन है। संचालनालय, भौमिकी तथा
खनिकर्म, क्षेत्रीय कार्यालय इंदौर के प्रतिवेदन अनुसार माइनिंग प्लान अनुरूप
कार्य नहीं हो रहा है तथा खदान को वर्टीकली काटा गया जो मप्र गौण खनिज नियमावली
1996 के नियम 42 घ (1) ज व झ का उल्लघंन है। राजस्व विभाग के प्रतिवेदन अनुसार
सीमांकन में पाया गया कि खनिज विभाग द्वारा दिए गए पट्टे की भूमि पर मुनारे
स्वीकृत क्षेत्र पर न लगाकर अन्य क्षेत्र पर लगाए गए है मौका स्थल स्वीकृत क्षेत्र
का नक्शा मिलान नहीं होता है। खनिज विभाग के प्रतिवेदन अनुसार खनन स्थलों के समीप
आबादी स्थित होने एवं ब्लास्टिंग द्वारा उत्खनन कार्य के कारण जनहानि संभावित है।
पुलिस अधीक्षक देवास के प्रतिवेदन 3 मार्च 2014 अनुसार प्रश्नाधीन खदान के समीप ही
हनुमान जी की 51 फीट उंची प्रतिमा स्थित है। उत्खनन कर्ता प्रश्नाधीन खदान में 51
फीट से 100 फीट गहरे होल कर पत्थर फोड़ते है। जिसके कारण जमीन में कंपन्न होता है,
जिससे मंदिर एवं मूर्तियां क्षतिग्रस्त होने की आशंका है। किसी भी दिन मंदिर या
मंदिर क्षतिग्रस्त हो गया तो साम्प्रदायिक दंगा भड़कने की आशंका है।
क्रमांक 421/2192/23-02-2015
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